tag:blogger.com,1999:blog-8231814.post-1095417234616878542004-09-17T16:00:00.000+05:302004-09-17T16:03:54.616+05:30दुआहर लम्हा ज़िंदगी का एक कोरा सफहा है, <br />कूची ख्वाहिशों की लेकर तुम इसमें रंग भर लो । <br /> <br />लेकर सुबह से सिंदूरी लाल, <br /> आकृति नये जीवन की बनाना । <br />फिर ले प्रणयी बासंती पीला, <br /> नित नये तुम स्वप्न सजाना । <br /> <br />मेहंदी से लेकर हरा रंग, <br /> अपना सुंदर संसार रचाना । <br />और ले विराट अम्बर से उसका रंग, <br /> स्वयं को उसके साथ उठाना । <br /> <br />फिर शुभ्र एक किनारी देकर, <br /> नई उमंग की ज्योत जगाना । <br />देना श्याम छोड़ निशा पर, <br /> उसे है केवल हमें निभाना । <br /> <br /> - आनन्द जैन <br />कृतिकारnoreply@blogger.com