बातें, कही अनकही
बातें, कही अनकही
पड़ी रह जाती हैं ।
जैसे सुबह की नर्म दूब पर पड़ी
ओस की बूंदें ।
जब कभी पाँव पड़ जाये
तो गुदगुदी सी होती है ।
या फिर डायरी के पन्नों पर पड़े
स्याही के कुछ छींटे ।
पीले पड़ते पन्नों पर,
चमक कभी नहीं जाती ।
बातें,
बस वही तो रह जाती हैं ।
- आनन्द जैन
4 टिप्पणियाँ:
बातें, कही अनकही
पड़ी रह जाती हैं ।
जैसे सुबह की नर्म दूब पर पड़ी
ओस की बूंदें ।
जब कभी पाँव पड़ जाये
तो गुदगुदी सी होती है ।
या फिर डायरी के पन्नों पर पड़े
स्याही के कुछ छींटे ।
पीले पड़ते पन्नों पर,
चमक कभी नहीं जाती ।
बातें,
बस वही तो रह जाती हैं ।
how do u write it in devnagri script?
आज पहली बार आप के चिठे पर आ का और हि*दी में टाइप कर अछा लगा है।
vah vah kya baat hai
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